] झाड़ियों में मिली नवजात बच्ची की हालत अब स्थिर, बाल कल्याण समिति ने संभाली जिम्मेदारी | गोद लेने के लिए लोग आए आगे, नाथुसरी कलां पंचायत करेगी मदद

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झाड़ियों में मिली नवजात बच्ची की हालत अब स्थिर, बाल कल्याण समिति ने संभाली जिम्मेदारी | गोद लेने के लिए लोग आए आगे, नाथुसरी कलां पंचायत करेगी मदद

नागरिक अस्पताल सिरसा के NICU वार्ड में भर्ती, स्वस्थ होने के बाद स्टेट एडॉप्शन अथॉरिटी को सौंपा जाएगा | नाथुसरी कलां ग्राम पंचायत ने भी पालन-पोषण में सहायता का किया वादा

 


सिरसा/चोपटा।

 हरियाणा के सिरसा जिले के चोपटा क्षेत्र से एक हृदय विदारक लेकिन उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। यहां झाड़ियों में लावारिस हालत में मिली नवजात बच्ची की जिंदगी अब सुरक्षित हाथों में है। बच्ची को सिरसा के नागरिक अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (NICU Ward) में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर है और उसकी देखभाल पूरी सतर्कता के साथ की जा रही है।

 

गोद लेने के लिए आए लोग, पंचायत ने भी दिया सहयोग का आश्वासन

 

घटना के बाद से ही बच्ची को गोद लेने के लिए लोग आगे आने लगे हैं। वहीं, नाथुसरी कलां की सरपंच रीटा कासनियां ने कहा कि अगर बच्ची को कोई नहीं अपनाता तो ग्राम पंचायत उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाएगी और उसके पालन-पोषण में हर संभव सहायता देगी। उन्होंने यह भी कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी ढांचे के तहत ही होगी, ताकि बच्ची का भविष्य सुरक्षित रह सके।

 

बाल कल्याण समिति की त्वरित कार्रवाई

 

जैसे ही घटना की सूचना मिली, जिला बाल कल्याण समिति हरकत में आ गई। समिति की अध्यक्ष अनीता वर्मा और सदस्य पूर्णिमा मोंगा ने तुरंत चौपटा थाना प्रभारी से संपर्क साधा और मामले की जानकारी ली। दोनों अधिकारी बाद में नागरिक अस्पताल पहुंचीं और डॉक्टरों से बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट प्राप्त की।

 

डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को फिलहाल विशेष निगरानी में रखा गया है। अनीता वर्मा ने कहा कि जब तक बच्ची पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाती, उसकी जिम्मेदारी नागरिक अस्पताल प्रशासन की होगी। इसके बाद उसे स्टेट एडॉप्शन अथॉरिटी को सौंपा जाएगा, जो उसके लिए सुरक्षित और उपयुक्त भविष्य तय करेगी।

 

पुलिस ने दर्ज किया मामला

 

इस घटना में आशा वर्कर इंद्रा देवी की शिकायत पर चौपटा थाना पुलिस ने अज्ञात महिला और पुरुष के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उस महिला की पहचान कर ली जाएगी, जिसने नवजात को झाड़ियों में छोड़ दिया। पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच का भरोसा दिया है।

 

पालना योजना’ (Cradle Baby Scheme) का विकल्प

 

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अनीता वर्मा ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अनचाहे बच्चे को असुरक्षित स्थानों पर न छोड़ें। उन्होंने बताया कि सिरसा नागरिक अस्पताल में पालना (Cradle Baby Scheme) की व्यवस्था की गई है।

 

इस योजना के तहत कोई भी अभिभावक यदि अपने बच्चे की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो वह बच्चे को सुरक्षित रूप से अस्पताल में पालने में छोड़ सकता है। इस दौरान बच्चे को छोड़ने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। न तो कोई सवाल किया जाता है और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई होती है।

 

इसके अलावा सीधे जिला बाल कल्याण समिति को भी बच्चे सौंपे जा सकते हैं। समिति समय-समय पर जागरूकता शिविर भी आयोजित करती है, ताकि इस तरह की अमानवीय घटनाओं को रोका जा सके।

 

समाज के लिए संदेश

 

यह घटना समाज के लिए कई सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर किसी मां ने अपने नवजात को झाड़ियों में छोड़कर ममता को शर्मसार किया, वहीं दूसरी ओर कई परिवार और नाथुसरी कलां की पंचायत बच्ची को सहारा देने के लिए सामने आई है। यह पहल दिखाती है कि यदि सही जागरूकता और व्यवस्था हो तो कोई भी बच्चा बेसहारा नहीं रह सकता।

 

 

चोपटा क्षेत्र की यह घटना एक ओर समाज की संवेदनहीनता को दर्शाती है तो दूसरी ओर इंसानियत और सहयोग की मिसाल भी पेश करती है। नागरिक अस्पताल की डॉक्टर टीम, बाल कल्याण समिति और पंचायत का सहयोग बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी बन रहा है। अब देखना यह होगा कि बच्ची को गोद लेने के इच्छुक लोगों में से कौन उसे कानूनी प्रक्रिया के बाद अपने घर का हिस्सा बनाएगा।

गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया

 

घटना के बाद से ही कई लोग बच्ची को गोद लेने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि बाल कल्याण समिति ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्ची को गोद लेने के लिए एक सुनिश्चित कानूनी प्रक्रिया है।

 

बच्ची को पहले स्टेट एडॉप्शन अथॉरिटी को सौंपा जाएगा।

 

अथॉरिटी इसके बाद बच्चे का पंजीकरण करेगी और उसे कानूनी रूप से गोद देने की प्रक्रिया पूरी करेगी।

 

इच्छुक परिवारों को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा।

 

बच्चे को गोद लेने से पहले परिवार की बैकग्राउंड जांच, आय-व्यय और देखभाल की क्षमता की जांच की जाएगी।

 

इसके बाद अदालत की अनुमति के बाद बच्चा गोद लेने वाले परिवार को सौंपा जाएगा।

 

इस प्रक्रिया से सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा सुरक्षित हाथों में जाए और उसके अधिकारों की रक्षा हो सके।

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