मूंगफली की खरीद न होने से परेशान किसानों ने नाथूसरी चोपटा अनाज मंडी के सामने किया रोड जाम
चोपटा प्लस न्यूज
अनाज मंडी नाथूसरी चोपटा में मूंगफली की खरीद न होने से परेशान किसानों ने सिरसा भादरा रोड जाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक रोड जाम करने से सिरसा भादरा रोड के दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइनें लग गई। पुलिस थाना प्रभारी सत्यवान के आश्वासन के बाद किसान रोड से हटे व आने जाने वालों को रास्ता दिया। इस दौरान किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाए । मूंगफली की खरीद न होने से परेशान आंदोलनकारी किसान संदीप बैनीवाल, कुंदन बैनीवाल, रमेश कुमार जोधकां, सतपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, गिरधारी लाल, संजय कुमार, महेंद्र सिंह, मदन लाल, देवीलाल, सहदेव भांभू निरबाण, रविंद्र कुमार ने बताया कि उनके पास मूंगफली बेचने के लिए मोबाइल पर मैसेज आया कि उनकी मूंगफली नाथूसरी चोपटा अनाज मंडी में सोमवार को खरीद की जाएगी। जिसको लेकर किसान सुबह से ही अनाज मंडी में अपनी मूंगफली लेकर आने शुरू हो गए। लेकिन जब टोकन की बारी आई तो अधिकारियों ने फर्द, गिरदावरी व अन्य कागजात मांगने शुरू कर दिए। किसानों का कहना है कि उनके पास मैसेज में ऐसी कोई मांग नहीं मिली की कागजात पूरे करने हैं। लेकिन अधिकारियों ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए टोकन देने से मना कर दिया। रोष स्वरूप किसानों ने करीब 2 बजे अनाज मंडी के गेट के सामने सिरसा भादरा रोड पर आंदोलन शुरू कर रोड को जाम कर दिया। आधे घंटे तक किसानों ने रोष प्रदर्शन करते किया और सरकार विरोधी नारे लगाए । इसी दौरान थाना प्रभारी नाथूसरी चौपटा सत्यवान दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की। और किसानों की समस्या सुनने के बाद थाना प्रभारी ने मंडी अधिकारियों से फोन पर बात की। व 1 घंटे में किसानों की समस्या का हल करने के आश्वासन के बाद किसान माने और रास्ते को खोल दिया गया। उधर किसानों का कहना है कि सरकार नए नए कानून लगा कर उन्हें परेशान कर रही है। जबकि इस काम धंधे के समय में उनके पास समय कम होता है और जब मंडी में अनाज बेचने के लिए आते हैं तो कभी कोई कागज लाना तो कभी कोई कागज लाने की मांग करके उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा उनकी फसल बेचने की प्रक्रिया को सरल किया जाए। उधर इस बारे में परचेज़र वेद प्रकाश से बात की गई तो उन्होंने कहा कि किसानों के पास मैसेज तो कृषि विभाग की तरफ से गया है, लेकिन उनकी गाइडलाइन के अनुसार उन्हें किसानों को कागजात तो पूरे करने ही होंगे तभी अपनी फसल बेच सकते हैं।

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