भूमण्डलीकरण यथार्थ वैश्वीकरण आज के युग में सभी प्रमुख विचारधाराओं भाषाओ सस्कृतियो एवं राष् की शब्दावली का हिस्सा प्राय ही बन गया है।
भूमण्डलीकरण आधुनिक युग की पहचान है। इसका प्रवेश भी समाजशास्त्र में दो या तीन दशक पुराना है।
भूमण्डलीकरण एक ऐसी व्यापक सामाजिक प्रक्रिया है, जो संपूर्ण मानव जीवन को स्वंय में समाहित कर लेती हैं ।
समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से भूमण्डलीयकरण को केवल यही नहीं समझना चाहिए कि भूमण्डलीकरण हमे एक अंतराष्टीय आर्थिक , सामाजिक एवं सास्कृतिक सूत्र में बाँधने वाला है। इसके अतिरिक्त यह हमारे प्रतिदिन के जीवन को भी प्रभावित करता है।
इन्टरनेशनल सोशियोलॉजी के अनुसार, 'शोध को उपयोगी बनाने और विश्व को समझने के लिए भूमण्डलीकरण को बहुलवादी होना ही पड़ेगा। भूमण्डलीकरण का सबंध ऐतिहासिक सामाजिक तथा व्यवहार से है।
भूमण्डलीकरण अनेक मोर्चों पर चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है. जिनमें सर्वोपरि आर्थिक को माना जा सकता है। इतिहास, बहुवादी सामाजिक प्राधार एवं सस्कृति संबधी कारणों तथा हमारे द्वारा विकास के लोकतांत्रिक मार्ग को अपनाए जाने के कारण ही भूमण्डलीकरणा की चुनौतियों का सामना करने हेतु हमारे पास अत्यधिक समुत्थान शक्ति है।
प्रस्तुत इकाई के अंतर्गत भूमण्डलीकरण या वैश्वीकरण का अर्थ, उसके विभिन्न घटक, प्रभाव, अभिलक्षण जो सामाजिक परिवर्तन से उत्पन्न हो रहे हैं, भूमण्डलीकरण की संस्कृति पहचान आदि के विषय में अध्यन करने का प्रयास किया गया हैं ।
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