गौभक्त और अनुशासनप्रीय थे मुरलीधर गोयल कांडा
कांडा बंधुओं ने की पुष्पांजलि भेंंट, पिता के बताए रास्ते पर चलने का लिया संकल्प
सिरसा, 11 अगस्त। गौभक्त और अनुशासनप्रीय थे मुरलीधर गोयल कांडा। उन्होंने पूरा जीवन आरएसएस में रहकर देश और सामाज की सेवा की। सन् 1948 और सन् 1975 में जब आरएसएस पर प्रतिबंध लगने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। क्योंकि उस समय श्री मुरलीधर कांडा सिरसा के संघ संचालक थे। यह बात मंगलवार को उनकी पुण्यतिथि पर हिसारिया बाजार स्थित बाबू मुरलीधर कांडा के पुराने कार्यालय ( कैंप कार्यालय ) में आयोजित श्रद्धांजली समारोह में श्रद्धासुमन भेंट करते हुए अनेक जागरुक लोगों ने कहे। इस अवसर पर स्व. मुरलीधर कांडा के ज्येष्ठ पुत्र गोपाल कांडा और गोबिंद कांडा सहित सैंकड़ो लोगों ने एडवोकेट मुरलीधर कांडा के चित्र के समक्ष पुष्प कर उन्हें श्रद्धांजली दी और उनके द्वारा किए गए गौ रक्षा के कार्यों को याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि पिता से मिले संस्कार को धारण करके ही वे जनसेवा में लगे हुए है जनसेवा ही उनका प्रमुख ध्येय है, आज वे राजनीति के माध्यम से जनसेवा में लगे हुए है।
सिरसा, 11 अगस्त। गौभक्त और अनुशासनप्रीय थे मुरलीधर गोयल कांडा। उन्होंने पूरा जीवन आरएसएस में रहकर देश और सामाज की सेवा की। सन् 1948 और सन् 1975 में जब आरएसएस पर प्रतिबंध लगने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। क्योंकि उस समय श्री मुरलीधर कांडा सिरसा के संघ संचालक थे। यह बात मंगलवार को उनकी पुण्यतिथि पर हिसारिया बाजार स्थित बाबू मुरलीधर कांडा के पुराने कार्यालय ( कैंप कार्यालय ) में आयोजित श्रद्धांजली समारोह में श्रद्धासुमन भेंट करते हुए अनेक जागरुक लोगों ने कहे। इस अवसर पर स्व. मुरलीधर कांडा के ज्येष्ठ पुत्र गोपाल कांडा और गोबिंद कांडा सहित सैंकड़ो लोगों ने एडवोकेट मुरलीधर कांडा के चित्र के समक्ष पुष्प कर उन्हें श्रद्धांजली दी और उनके द्वारा किए गए गौ रक्षा के कार्यों को याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि पिता से मिले संस्कार को धारण करके ही वे जनसेवा में लगे हुए है जनसेवा ही उनका प्रमुख ध्येय है, आज वे राजनीति के माध्यम से जनसेवा में लगे हुए है।
इस अवसर पर पुराने समय को याद करते हुए मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन कृष्ण लाल सैनी ने बताया कि 1 फरवरी 1967 को बाबू मुरलीधर दिल्ली में गौ रक्षा सत्याग्रह में शिरक्त करने गए और गौरक्षा आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें दो महीने तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। मुरलीधर कांडा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कुसुम्भी के पूर्व सरपंच जय सिंह चेयरमैन ने कहा कि एडवोकेट मुरलीधर गोयल कांडा वरिष्ठ वकील थे। उन्होंने वकालत के क्षेत्र में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए और सदैव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सिद्धांतो पर अडिग रहे। भादरा बाजार के प्रसिद्ध उद्योगपति गौरी शंकर सर्राफ ने कहा कि भले ही आज बाबू मुरलीधर हमारे बीच नहीं पर उनके संस्कार और उनके द्वारा जगाई गई समाज सेवा की ज्योत आज भी रोशन है। इस अवसर पर सूरत सैनी, पूर्व पार्षद राजेंदर मकानी, पार्षद रीना सेठी, पार्षद मनोज मकानी, पार्षद महावीर सिंह, रोहताश वर्मा, पार्षद प्रतिनिधि सुनील कुमार, अमित सोनी, भूषण बरोड, नितिन सेठी, हरिश मेहता उर्फ गोलू, इद्रोश गुज्जर, अमित चुघ, अंग्रेज बठला, गुरदयाल सैनी, निर्मल कांडा, मदन जांगड़ा, हरफूल शर्मा, पप्पू राँझा, साहब राम जांगड़ा, गुलशन गुप्ता, पवन शर्मा, नरेंदर कटारिया, अनमोल मक्कड़, विनोद कनोडिया, सुभाष चौधरी, मुरलीधर कांडा, मुकेश सर्राफ, श्याम भारती, विजय राव, सुदेश पचार डिंग मंडी, सुमित बब्बर, हर्ष अरोड़ा, संदीप शर्मा, रवि फुटेला, राजपाल शर्मा, चाहत विज, दीपक गुप्ता सहित हलोपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और अनेक पार्षद मौजूद थे
फोटो परिचय :- स्व. मुरलीधर कांडा को श्रद्धासुमन अर्पित करते गोपाल कांडा गोबिंद कांडा व अन्य ।
============
बाबू मुरलीधर कांडा एडवोकेट की रग-रग में बसी हुई थी जनसेवा और राष्ट्रसेवा
इमरजेंसी में जेल से रिहाई के लिए मॉफी मांगने से साफ कर दिया था इंकार
विरासत में मिली जनसेवा और राष्ट्रसेवा को आगे बढ़ाने में लगे हुए है कांडा बंधु
इमरजेंसी में जेल से रिहाई के लिए मॉफी मांगने से साफ कर दिया था इंकार
विरासत में मिली जनसेवा और राष्ट्रसेवा को आगे बढ़ाने में लगे हुए है कांडा बंधु
सिरसा। जिस व्यक्ति के रग रग में राष्ट्रसेवा और जन सेवा का भाव भरा हो उसके सामने सारे सुख तुच्छ हो जाते है। पारिवारिक दायित्व निभानेे के साथ साथ उन्होंने जनसेवा और राष्ट्र सेवा को सदैव प्राथमिकता दी। आरएसएस के प्रथम सिरसा प्रमुख रहते हुए उन्होंने संघ की विचारधारा को जन जन तक पहुंचाया। लोगों में राष्ट्रभावना का संचार किया। इमरजेंसी में जेल से रिहार्ई के लिए रखी गई माफी मांगने के शर्त मानने से उन्होंने साफ इंकार कर दिया था ऐसी महान शख्सियत का नाम था एडवोकेट मुरलीधर कांडा। मुरलीधरकांडा सेे विरासत में मिली जनसेवा और राष्ट्रसेवा की भावना को उनके पुत्र सिरसा के विधायक, पूर्व गृहराज्यमंत्री गोपाल कांडा और श्री बाबा तारा कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा संभाले हुए है। जनसेवा के लिए उन्होंने राजनीति का सहारा लिया और आज वे लोग हर व्यक्ति के सुख दुख मे साथ खड़े दिखाई देते है। हर आंख से आंसू पौछकर उसका दामन खुशियों से भरने में लगे हुए है।
परोपकार के विचार लेकर श्री मुरलीधर गोयल कांडा 1926 में लाहौर से वकालत की पढ़ाई करके सिरसा पंहुंचे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के प्रचार-प्रसार को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया। आरएसएस. की स्थापना कांडा की वकालत की पढ़ाई पूर्ण होने के मात्र एक वर्ष पूर्व सन् 1925 को विजय दशमी के दिन डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा की गई थी। राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व की विचारधारा के साथ-साथ वे देश को अंग्रेजों के राज से मुक्त करवाने के लिए संघर्षरत रहे। सन् 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया और आरएसएस. के सिरसा तहसील के प्रमुख होने के कारण मुरलीधर गोयल कांडा को भी फरवरी 1948 में गिरफ्तार कि या गया और गुडग़ांव जेल में रखा गया। उन्होंने 1952 में हुए संयुक्त पंजाब के विधानसभा चुनाव में सिरसा के डबवाली विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का उम्मीदवार बनाया और उन्होंने दीपक के चुनाव चिन्ह पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा।
मुरलीधर गोयल कांडा के आह्वान पर 30 जनवरी 1967 की दोपहर को अनेक गौ भक्त सिरसा के आर्य समाज मंदिर में एकत्रित हुए और फिर सायं 6.00 बजे दिल्ली में सत्याग्रह में शामिल होने के लिए रवाना हो गये। उस वक्त मुरलीधर कांडा ने निर्णय लिया कि हम सभी 34 व्यक्ति अचानक एक जत्थे के रूप में चांदनी चौक के बाजारों में निकलेंगे और गौरक्षा के लिए आवाज बुलंद करेंगे। देखते ही देखते सारा चांदनी चौक गौ माता की जयÓ जैसे गगन भेदी नारों से गूंज उठा। उसी वक्त पुलिस ने सभी को गिरफ्तार किया और चांदनी चौक थाने में ले गयी। थाने में पहले से ही अलवर जिले से आए अनेक गौ भक्त गिरफ्तार करके लाए हुए थे। उसके पश्चात पुलिस ने उन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तिहाड़ जेल भेज दिया। तिहाड़ जेल अधीक्षक ने वकील होने के कारण मुरलीधर कांडा को बी क्लास सुविधाएं देने की बात कही परन्तु उन्होंने कहा कि वे अपने साथियों के साथ ही रहेंगे। भारत-पाक युद्ध के समय सीमा पर जा रहे सैनिकों को एक घंटे में भोजन व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का चैलेंज श्री मुरलीधर कांडा ने स्वीकार किया और हजारों सैनिकों को भोजन व अन्य सुविधाएं मात्र 24 घंटे में उपलब्ध करवाई।
25 जून 1975 को पूरे देश में एमरजेंसी की घोषणा कर दी गई, नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रैस पर सेंसरशिप लागू कर दी। अनेक संगठनों और राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आपातकाल का जबरदस्त विरोध किया जिसका परिणाम यह हुआ कि आरएसएस. के स्वयंसेवकों की पूरे देश में गिरफ्तारियां आरंभ हो गई और उन्हें जेल में डालकर यातनाएं दी जाने लगीं। आपातकाल विरोधी इस आन्दोलन से सिरसा भी अछूता ना रहा और संघ के स्वयंसेवकों ने भी आपातकाल का डट कर विरोध किया। उस वक्त मुरलीधर गोयल कांडा सिरसा के आरएसएस. के प्रमुख थे क्योंकि उनके नेतृत्व में भी बार-बार आरएसएस. द्वारा आपातकाल का विरोध किया जा रहा था। तब 04 जुलाई 1975 को थाना शहर सिरसा में पुलिस ने एफआईआर नंबर 151 डिफेंस आफ इंडिया रूल नं-33 के तहत मुरलीधर गोयल कांडा के विरूद्ध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया और पंाच जुलाई 1975 को उन्हें सिरसा जेल भेज दिया और उसके पश्चात 08 सितंबर 1975 को उन्हें हिसार सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया।
आपातकाल के दौरान जेल में ही मुरलीधर गोयल कांडा की तबीयत खराब हुई तो सरकार औैर जेल प्रशासन ने कहा कि अगर वे मॉफी मांग लें तो उन्हेंं रिहा किया जा सकता हैै पर उन्होंने मॉफी मांगने से साफ इंकार कर दिया था। जेल में साथियों के बीच एक ही गीत गाया करते थे कि। मानव जीवन होना चाहिए उपकार के लिए, चाहे तन-मन लुट जाए संसार के लिएÓ। उन्होंने साफ कर दिया था कि भीगा हुआ आदमी बरसात से नहीं डरताÓ। आपातकाल के समय को याद करते हुए उस समय बाबू के साथी रहे अनेक स्वयंसेवकों ने पुरानी यादों को फिर से ताजा करते हुए बड़े गर्व से बताया कि उन्हें मालूम था कि संघ पर प्रतिबंध लगने के बाद यदि सिरसा क्षेत्र में कोई गिरफ्तारी होगी तो वो बाबू मुरलीधर की ही होगी और हुआ भी यही। कई महीने तक जेल मे रहने के दौरान मुरलीधर पीलिया से पीडि़त हो गये जेल अधिकारियों ने उनको रिहाई के लिए माफी मांगकर या यह लिखकर कि उनका आर.एस.एस. से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने जबाव दिया भीगा हुआ आदमी बरसात से नहीं डरताÓ इससे पहले भी मैं 1948 और 1967 में जेल जा चुका हूं । परंतु तब भी असत्य के सामने ना तब झुका था और ना ही अब झुकूंगा। इसी पीलिया की बीमारी के कारण मुरलीधर कांडा जी का निधन हो गया। उस वक्त वे सिरसा के जिला संघ संचालक थे।
बाबू मुरलीधर कांडा के बारे में उड़ीसा के राज्यपाल प्रो. गणेशीलाल अकसर कहते थे कि कांडा सच्चे एवं समर्पित स्वयं सेवक थे। उन्होंने कहा कि उनके रक्त के कण-कण में संघ के संस्कार थे। मुरलीधर कांडा के निधन के बाद उनके पुत्रों गोपाल कांडा, गोबिंद कांडा व महान कांडा ने समाजसेवा का बीड़ा उठाया। सिरसा और आस-पास जिलो के ही नहीं बल्कि समस्त हरियाणावासी जानते है कि गोपाल-गोबिंद ने अपने पिता स्व. मुरलीधर कांडा की स्मृति में उन्होंने चेरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया। इस ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित नेत्रालय में हजारों रोगियों को नई नेत्र ज्योति हासिल हो चुकी है। लाखों नेत्र रोगियों का इस अस्पताल में उपचार किया जा चुका है। दिसंबर 2006 से प्रत्येक शनिवार को यहां पर नेत्र जांच व ऑपरेशन कैंप आयोजित किया जाता है तथा निर्धन रोगियों को खाना-पीना, दवा और ऑपरेशन तक नि:शुल्क किया जाता है। इस नेत्रालय द्वारा गांव-गांव में 1756 से अधिक नि:शुल्क जांच शिविर आयोजित किए जा चुके है तथा सैंकड़ो निर्धन कन्याओं की शादियां करवाई जा चुकी है। स्व. मुरलीधर कांडा ने परोपकार की जो मशाल जलाई थी, आज उनके पुत्र उस मशाल की ज्योति को अधिक फैलाने का कार्य कर रहे हैं।
परोपकार के विचार लेकर श्री मुरलीधर गोयल कांडा 1926 में लाहौर से वकालत की पढ़ाई करके सिरसा पंहुंचे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के प्रचार-प्रसार को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया। आरएसएस. की स्थापना कांडा की वकालत की पढ़ाई पूर्ण होने के मात्र एक वर्ष पूर्व सन् 1925 को विजय दशमी के दिन डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा की गई थी। राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व की विचारधारा के साथ-साथ वे देश को अंग्रेजों के राज से मुक्त करवाने के लिए संघर्षरत रहे। सन् 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया और आरएसएस. के सिरसा तहसील के प्रमुख होने के कारण मुरलीधर गोयल कांडा को भी फरवरी 1948 में गिरफ्तार कि या गया और गुडग़ांव जेल में रखा गया। उन्होंने 1952 में हुए संयुक्त पंजाब के विधानसभा चुनाव में सिरसा के डबवाली विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का उम्मीदवार बनाया और उन्होंने दीपक के चुनाव चिन्ह पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा।
मुरलीधर गोयल कांडा के आह्वान पर 30 जनवरी 1967 की दोपहर को अनेक गौ भक्त सिरसा के आर्य समाज मंदिर में एकत्रित हुए और फिर सायं 6.00 बजे दिल्ली में सत्याग्रह में शामिल होने के लिए रवाना हो गये। उस वक्त मुरलीधर कांडा ने निर्णय लिया कि हम सभी 34 व्यक्ति अचानक एक जत्थे के रूप में चांदनी चौक के बाजारों में निकलेंगे और गौरक्षा के लिए आवाज बुलंद करेंगे। देखते ही देखते सारा चांदनी चौक गौ माता की जयÓ जैसे गगन भेदी नारों से गूंज उठा। उसी वक्त पुलिस ने सभी को गिरफ्तार किया और चांदनी चौक थाने में ले गयी। थाने में पहले से ही अलवर जिले से आए अनेक गौ भक्त गिरफ्तार करके लाए हुए थे। उसके पश्चात पुलिस ने उन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तिहाड़ जेल भेज दिया। तिहाड़ जेल अधीक्षक ने वकील होने के कारण मुरलीधर कांडा को बी क्लास सुविधाएं देने की बात कही परन्तु उन्होंने कहा कि वे अपने साथियों के साथ ही रहेंगे। भारत-पाक युद्ध के समय सीमा पर जा रहे सैनिकों को एक घंटे में भोजन व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का चैलेंज श्री मुरलीधर कांडा ने स्वीकार किया और हजारों सैनिकों को भोजन व अन्य सुविधाएं मात्र 24 घंटे में उपलब्ध करवाई।
25 जून 1975 को पूरे देश में एमरजेंसी की घोषणा कर दी गई, नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रैस पर सेंसरशिप लागू कर दी। अनेक संगठनों और राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आपातकाल का जबरदस्त विरोध किया जिसका परिणाम यह हुआ कि आरएसएस. के स्वयंसेवकों की पूरे देश में गिरफ्तारियां आरंभ हो गई और उन्हें जेल में डालकर यातनाएं दी जाने लगीं। आपातकाल विरोधी इस आन्दोलन से सिरसा भी अछूता ना रहा और संघ के स्वयंसेवकों ने भी आपातकाल का डट कर विरोध किया। उस वक्त मुरलीधर गोयल कांडा सिरसा के आरएसएस. के प्रमुख थे क्योंकि उनके नेतृत्व में भी बार-बार आरएसएस. द्वारा आपातकाल का विरोध किया जा रहा था। तब 04 जुलाई 1975 को थाना शहर सिरसा में पुलिस ने एफआईआर नंबर 151 डिफेंस आफ इंडिया रूल नं-33 के तहत मुरलीधर गोयल कांडा के विरूद्ध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया और पंाच जुलाई 1975 को उन्हें सिरसा जेल भेज दिया और उसके पश्चात 08 सितंबर 1975 को उन्हें हिसार सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया।
आपातकाल के दौरान जेल में ही मुरलीधर गोयल कांडा की तबीयत खराब हुई तो सरकार औैर जेल प्रशासन ने कहा कि अगर वे मॉफी मांग लें तो उन्हेंं रिहा किया जा सकता हैै पर उन्होंने मॉफी मांगने से साफ इंकार कर दिया था। जेल में साथियों के बीच एक ही गीत गाया करते थे कि। मानव जीवन होना चाहिए उपकार के लिए, चाहे तन-मन लुट जाए संसार के लिएÓ। उन्होंने साफ कर दिया था कि भीगा हुआ आदमी बरसात से नहीं डरताÓ। आपातकाल के समय को याद करते हुए उस समय बाबू के साथी रहे अनेक स्वयंसेवकों ने पुरानी यादों को फिर से ताजा करते हुए बड़े गर्व से बताया कि उन्हें मालूम था कि संघ पर प्रतिबंध लगने के बाद यदि सिरसा क्षेत्र में कोई गिरफ्तारी होगी तो वो बाबू मुरलीधर की ही होगी और हुआ भी यही। कई महीने तक जेल मे रहने के दौरान मुरलीधर पीलिया से पीडि़त हो गये जेल अधिकारियों ने उनको रिहाई के लिए माफी मांगकर या यह लिखकर कि उनका आर.एस.एस. से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने जबाव दिया भीगा हुआ आदमी बरसात से नहीं डरताÓ इससे पहले भी मैं 1948 और 1967 में जेल जा चुका हूं । परंतु तब भी असत्य के सामने ना तब झुका था और ना ही अब झुकूंगा। इसी पीलिया की बीमारी के कारण मुरलीधर कांडा जी का निधन हो गया। उस वक्त वे सिरसा के जिला संघ संचालक थे।
बाबू मुरलीधर कांडा के बारे में उड़ीसा के राज्यपाल प्रो. गणेशीलाल अकसर कहते थे कि कांडा सच्चे एवं समर्पित स्वयं सेवक थे। उन्होंने कहा कि उनके रक्त के कण-कण में संघ के संस्कार थे। मुरलीधर कांडा के निधन के बाद उनके पुत्रों गोपाल कांडा, गोबिंद कांडा व महान कांडा ने समाजसेवा का बीड़ा उठाया। सिरसा और आस-पास जिलो के ही नहीं बल्कि समस्त हरियाणावासी जानते है कि गोपाल-गोबिंद ने अपने पिता स्व. मुरलीधर कांडा की स्मृति में उन्होंने चेरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया। इस ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित नेत्रालय में हजारों रोगियों को नई नेत्र ज्योति हासिल हो चुकी है। लाखों नेत्र रोगियों का इस अस्पताल में उपचार किया जा चुका है। दिसंबर 2006 से प्रत्येक शनिवार को यहां पर नेत्र जांच व ऑपरेशन कैंप आयोजित किया जाता है तथा निर्धन रोगियों को खाना-पीना, दवा और ऑपरेशन तक नि:शुल्क किया जाता है। इस नेत्रालय द्वारा गांव-गांव में 1756 से अधिक नि:शुल्क जांच शिविर आयोजित किए जा चुके है तथा सैंकड़ो निर्धन कन्याओं की शादियां करवाई जा चुकी है। स्व. मुरलीधर कांडा ने परोपकार की जो मशाल जलाई थी, आज उनके पुत्र उस मशाल की ज्योति को अधिक फैलाने का कार्य कर रहे हैं।

0 टिप्पणियाँ