उत्तर भारत पर मौसम का ट्रिपल हमला जोर पकड़ चुका है। पहाड़ों में भारी बर्फबारी और मैदानों में घना कोहरा व बर्फीली हवाओं ने हालात बिगाड़ दिए हैं। भारत मौसम विभाग ने विशेष बुलेटिन जारी कर हरियाणा के अंबाला,कुरुक्षेत्र,करनाल तो पंजाब के अमृतसर,कपूरथला,जालंधर,लुधियाना ,एसबीएस नगर व पटियाला में रेड अलर्ट को घोषित किया है।
खासकर हरियाणा और पंजाब के मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड और कम दृश्यता ने किसानों व यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्काईमेट वेदर और भारत मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में यातायात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। नए साल की पूर्व संध्या से पंजाब और हरियाणा में मौसम खराब चल रहा है। अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, हिसार, अंबाला और करनाल जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बूंदाबांदी दर्ज की गई। हिसार में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जबकि चंडीगढ़ में 6 डिग्री पर सिमट गया। बारिश थमने के बाद मौसम साफ हुआ, लेकिन बर्फीली हवाओं ने हाड़ कम्पा देने वाली सर्दी बढ़ा दी। बेशक न्यूनतम तापमान में गिरावट हिसार व चंडीगढ़ में हुई हो पर रात्रि का तापमान सबसे कम हरियाणा के नारनौल में रहा। यहाँ न्यूनतम पारा 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब में सबसे कम तापमान एसबीएस नगर में 6.7 डिग्री सेल्सियस रहा। इस हरियाणा के तराई इलाकों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे सुबह 8 बजे तक दृश्यता 50 मीटर से कम हो गई। पंजाब के मालवा क्षेत्र में किसान धान की फसल की कटाई पूरी करने को जद्दोजहद कर रहे हैं, क्योंकि ठंड से नमी बढ़ने से अनाज खराब होने का खतरा है। आईएमडी के अनुसार, अगले 48 घंटों में दोनों राज्यों में शीतलहर तेज होगी, न्यूनतम तापमान 2-4 डिग्री तक लुढ़क सकता है।
पहाड़ों में 'चिल्लई कलां' का असर तेज़
कश्मीर, जम्मू और हिमाचल में भारी हिमपात से चिल्लई कलां और सख्त हो गया। पुंछ, लाहौल-स्पीति, रोहतांग और अटल टनल क्षेत्र बर्फ की मोटी चादर से लकदक हैं। इन पहाड़ी इलाकों से उतर रही ठंडी हवाएं हरियाणा-पंजाब तक पहुंच रही हैं, जिससे मैदानी इलाकों में चुभन वाली ठंड बढ़ रही है।
यातायात पर ब्रेक, सतर्कता बरतें
कोहरे से दिल्ली-चंडीगढ़, अमृतसर-दिल्ली और हिसार-रोहतक हाईवे पर वाहन रेंग रहे हैं। कई ट्रेनें लेट हैं, जबकि फ्लाइट्स प्रभावित। हरियाणा-पंजाब पुलिस ने चेतावनी जारी की है- धीमी गति से चलें, फॉग लाइट्स जलाएं। किसानों को सलाह है कि फसल को नमी से बचाएं। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि 5 जनवरी तक राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक सतर्क रहना जरूरी

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