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आषाढ का महीना बिना बारिश बीता, चोपटा क्षेत्र में सूखे का खतरा मंडाराया, बारिश के अभाव में सूखने लगी फसलें, किसानों की चिंता बढ़ी
चोपटा-- क्षेत्र में पड़ रही भंयकर गर्मी व बारिश के अभाव में सावनी की फसलें सूखने लगी हैं। समय पर सिंचाई ने होने के कारण बीटी नरमें व देशी 

कपास, गवार, बाजरे व अरंड के पौधे झुलसने लगे हैं जिससे उनकी बढवार रूक गई है। इस कारण किसानों के चेहरोंं पर चिंता की लकीरे खींच गई है। 

किसानों का कहना है कि आषाढ़ का महीना बिना बारिश बीत गया है। कहीं यह अकाल या सूखे की आहट तो नहीं। इस बार चोपटा खंड में 37500 हेक्टेयर 

में बीटी नरमा जिसमें 2150 हेक्टेयर में देशी कपास, 3200 हेक्टेयर में धान, 11500 हेक्टेयर में गवार, 1450 हेक्टेयर में बाजरा, 2400 हेक्टेयर में मुंगफली, 650 

हेक्टेयर में अंरड की फसल की बिजाई की जा चुकी है। इस फसल पर सूखे का खतरा मंडराने लगा है। बारिश के अभाव में बिरानी जमीन में अभी बिजाई 

नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में देशी कपास व बीटी नरमें की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने लगी है, वहीं बिरानी जमीन में ग्वार व 

बाजरे की बिजाई में भी देरी हो रही है। एक दो दिन में बारिश हो जाए तो बिरानी ग्वार व बाजरे की फसल  की बिजाई कर दी जाएगी। राजस्थान की सीमा 

से सटे पैतालिसा क्षेत्र के  कागदाना, कुम्हारिया, खेड़ी, चाहरवाला, जोगीवाला, रामपूरा नवाबाद, जसानियां, गिगोरानी, शाहपूरिया, तरकांवाली, रामपूरा ढिल्लो, 

हंजीरा, बरासरी सहित कई गांव नहरों के अंतिम छोर पर पडऩे के कारण इन गांवों की अधिकतर जमीन बिरानी है तथा सावनी की फसल मानसून की बारिश 

पर आधरित होती है।  किसानों ने बीटी नरमें व देशी कपास की बिजाई तो कर दी। लेकिन नहरी पानी के अभाव के कारण उसमें सिंचाई नहीं हो पा रही है। 

क्षेत्र में पड़ रही गर्मी में फसल झुलसने लगी है। किसान जगदीश, महेंद्र सिंह व सुरेश कुमार का कहना है कि बिरानी जमीन पर ग्वार व बाजरे की बिजाई की 

जाती है लेकिन आषाढ़ का पूरा महीना बिना बारिश बीत जाने के कारण कपास व नरमें, गवार बाजरे  की फसल नष्ट होने के कगार पर है व बिरानी जमीन 

खाली पड़ी है। किसानों का कहना है कि अब तो बारिश होने पर ही फसल बच सकती है। 
वर्जन
इस समय फसलों में सिचांई की आवश्यकता है। सिंचाई के अभाव में फसलों के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। सावनी की फसल में बारिश से 
फयदा होता है। अब जल्द बारिश हो जाए तो फसलों के लिए संजीवनी का काम करेगी। इस बार चोपटा खंड में 37500 हेक्टेयर में बीटी नरमा जिसमें 2150 क्टेयर में देशी कपास, 3200 हेक्टेयर में धान, 11500 हेक्टेयर में गवार, 1450 हेक्टेयर में बाजरा, 2400 हेक्टेयर में मुंगफली, 650 हेक्टेयर में अंरड की फसल की बिजाई की जा चुकी है। जिसमें सिचंाई की जरूरत है। इसके अलावा बिरानी जमीन में भी बिजाई नहीं हो पाई है। बारिश होने पर बिजाई की जा सकेगी। 

--- डॉ बहादर गोदारा कृषि विकास अधिकारी

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